घपले से घोटाले तक (व्यंग्य)
घोटाला करना आजकल हमारे पारिवारिक गौरव का अविभाज्य अंग हो गया है. आधुनिक घोटालावादी संस्कृति के राष्ट्रीय प्रवर्तकों ने इसके सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पक्ष को इतनी मजबूती और गरिमा प्रदान कर दी है कि अब किसी भी देशभक्त के लिए घोटाले के बिना जीना ऐसा ही होगा जैसे कश्मीर के बिना भारत. इस क्षेत्र में उनके नए नए कीर्तिमानों ने राष्ट्रीय सम्मान में तो वृध्दि की है, साथ ही हम जैसे लोगों को भी अपनी ईमानदारी की अल्पसंख्यक मानसिकता से ऊपर उठ कर राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ने का सौभाग्य दिया है.
यूँ तो काफी समय से छोटी मोटी घपलेबाजी किसी ने किसी रूप में हमारे घर की आर्थिक नीति में अपना दखल बनाए हुए थी, पर सभी सम्बंधित पक्षों द्वारा उस पर चार्टर्ड एकाऊंटीटीय झूठ का रंगीन पर्दा डाल कर ” सब कुछ ठीक ठाक है ‘ का भ्रम पैदा किया जाता था. घपलेबाजी करने वाला अपनी घपलेबाजी का पर्दाफाश होने के डर से मन ही मन घबराता भी रहता था. किन्तु जबसे देश में ‘घोटाला क्रांति ‘ का युग आया है . हमारी घरेलु घपलेबाजी भी फ़ालतू की शर्म से बाहर आकर घोटाले की गरिमा को प्राप्त कर गयी है. पहले का शर्मीला घपलेबाज़ अब गर्वीला घोटालेबाज हो गया है. मसलन , हमारी इकलौती शादी के दूसरे महीने से ही श्रीमतीजी ने घर खर्च का हानि वाला बजट बना कर हमारी आय पर अपने प्रत्यक्ष करों का अनावश्यक बोझ लाद दिया था. कुछ समय बाद हमें पक्के सबूत मिल गए थे कि वे घर खर्च के नाम पर वसूली गयी राशि में से अपने निजी खर्चों को बढ़ावा दे रही हैं किन्तु उन्होंने इस पर प्रशासकीय चुप्पी साध रखी थी और हम सी बी आई की तरह असहाय होकर सत्ता पक्ष के खिलाफ कोई भी कदम उठाने का साहस नहीं जुटा पाए थे. हाँ खुद को तसल्ली देने के लिए अपने दिल के एफ आई आर में ब्यूटी पार्लर वाली मोना , कृष्ण ज्वेलर के सुभाष और रोयल फैंसी स्टोर के नाम दर्ज कर लिए थे. श्रीमतीजी ने स्वयम कभी इस घपले की स्वीकृति नहीं भरी थी . वे सरकारी आयोगों की रिपोर्टों की तरह अपनी कारगुजारिओं को जनहित में छिपाती रहीं थीं .
लेकिन इस बदले हुए आर्थिक परिदृश्य से उनमे ज़बरदस्त मुखरता आई है.अपनी इस घपलेबाजी को घोटाला कहकर खुले आम स्वीकारने का एक अपूर्व नैतिक साहस उनमे आ गया है. अब अपनी महिला किटी पार्टियों में वह अत्यंत विस्तार के साथ अपने पारिवारिक घोटालों का आर्थिक विवेचन प्रस्तुत करतीं हैं. इसी प्रकार का मौखिक पावर पॉइंट प्रेसेंटेशन उनकी कई अन्य सहेलियां भी अपने अपने पारिवारिक सन्दर्भों में करतीं हैं और इस तरह से वे सभी एक दूसरे के घोटाले को नैतिक समर्थन देते हुए पतियों की साम्प्रदायिकता के खिलाफ अपना गठबंधन मजबूत करतीं हैं. ऐसे ही किछ दिनों पूर्व, पत्नि के हाथ में मेरी पासबुक पड़ गयी थी. उसमे उन्हें पेट्रोल बिल व यात्रा विराम भत्तों के माध्यम से प्राप्त उस राशि का हवाला मिला जो मैं अपनी पुरानी प्रेमिका के पत्रों की तरह उनसे अब तक छिपाता आया था. उस दिन मेरी घर वापसी पर उन्होंने इस घोटाले पर विपक्षी पार्टी की तरह से हल्ला मचाते हुए मुझ पर कुर्सी, जूते व चप्पल फेंक कर अपना शालीन विरोध प्रदर्शित किया था. जब उनका आक्रोश कुछ ठंडा हुआ तो मैंने भी बड़ी बेशर्मी से उन पर तीखे प्रहार शुरू कर दिए थे और उनकी गोपनीय पासबुक की फोटोकापी दिखा कर उसमे जमा फ्हन की कैफियत तलब करने लगा था. इस प्रकार एक दूसरे पर कीचड उछालने से हमारे आपसी सम्बन्ध अधिक मजबूत हुए और हम प्रसन्नतापूर्वक चाय पीने लगे .
एक दिन हमारा सात वर्षीय पुत्र पड़ोस की एक आंटी के घर सी वापिस लौटने को तैयार नहीं था.पड़ोस के प्रति उसकी ऐसी सघन निष्ठां हमारे लिए अप्रत्याशित थी. हमने उसे बहुत पुचकारा समझाया पर वह उसी आंटी के पक्ष में मतदान करने की जिद पर अड़ा हुआ था. बड़ी मुश्किल से समझा बुझा कर उसे वापस लाये. इस मामले में खोज बीन करने पर मालूम पड़ा कि उन आंटी ने मोहल्ले के बच्चों की सबसे प्यारी आंटी होने का खिताब अर्जित करने के लिए चोकलेट और टोफीयों का लालच देकर हमारे पुत्र समेत कई बच्चों को अपने खेमे में कर लिया था. पर हमारा पुत्र ऐसे किसी भी माल सामान को प्राप्त करने की बात मानने से साफ़ इनकार करता रहा. बाद में हमारी घरेलु खुफिया एजेंसी यानि हमारी काम वाली बाई ने उसकी नेकर की जेब से चोकलेट और टोफीयों के रैपर बरामद करके इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य भी उपलब्ध करवा दिए थे. हमने ऊपर से अपने कुलदीपक के इस कार्य की निंदा की किन्तु अन्दर ही अन्दर हम एक पाशविक आनंद से भर गए थे कि लड़का सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. अगर इसके घोटालावादी प्रयोग इसी गंभीरता से चलते रहे तो यह आगे चल कर ज़रूर मधु कोड़ा का रिकॉर्ड तोड़ेगा .
हमारा पूरा परिवार अपने नेताओं का आभारी है कि भौतिक सुख सुविधाओं के मामले में भले ही उन्होंने हम जैसे परिवारों को भूतकाल में रखा हो पर कम से कम घोटालों के मामले में उन्होंने हमें भी राष्ट्र के वर्तमान से जुड़ने का अवसर प्रदान किया है.इसमें कोई शक नहीं कि अगर हम अपनी इस निजी घोटालावादिता को खुली अर्थव्यवस्था से जोड़ दें तो एक दिन अपना भी खाता स्विस बैंक में खुल जायेगा.
डी- २०४, संकल्प २, पिम्परी पाडा, फिल्म सिटी रोड, मलाड [पूर्व], मुंबई-
४०००९७.


nice vyang …… aajkal gotale logo ke man sman ki baat ho gai hai… jo jitne jyada gotale karega utna hi jyada ijat paayega…. kya kahne
Idhar ghotala, udhar ghotala / Jahan dekhen vahan ghotala / Ye dunia banki bada ghotala / Vyanga me likha kya khoob ghotala.
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