मीना चोपडा़ की कुछ कविताएं
इश्क़
क़फ़न में लिपटा बादलों के
छुपता सूरज
अँधेरी कब्र में सो चुका था
न जाने कब से
अपने आप से रूठा सूरज
एक आग के दरिया में
बहते किनारे उफक के
न जाने जलते रहे किसके लिए
दिन के ढल जाने तक|
कौन था वह?
न जाने कबसे
खड़ा था जो सामने बाहें पसारे
पौ के फटने और भोर के हो जाने तक!
कब्र के फटने और कफ़न के उड़ जाने तक!
ओस की बूँद में बैठा छिपकर साँसे लेता
इश्क का कोई टूटा हुआ
टुकड़ा है शायद
किसी बिसरे हुए गीत का
कोई भटका हुआ
मुखड़ा है शायद!
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कविता
वक्त की सियाही में
तुम्हारी रौशनी को भरकर
समय की नोक पर रक्खे
शब्दों का कागज़ पर
कदम-कदम चलना!
एक नए वज़ूद को
मेरी कोख में रखकर
माहिर है कितना
इस कलम का
मेरी उँगलियों से मिलकर
तुम्हारे साथ-साथ
यूँ सुलग सुलग चलना!
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ओस की एक बूँद
ओस में डूबता अन्तरिक्ष
विदा ले रहा है
अँधेरों पर गिरती तुषार
और कोहरों की नमी से!
और यह बूँद न जाने
कब तक जियेगी
इस लटकती टहनी से
जुड़े पत्ते के आलिंगन में!
धूल में जा गिरी तो फिर
मिट के जाएगी कहाँ?
ओस की एक बूँद
बस चुकी है कब की
मेरे व्याकुल मन में!
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एक सीप, एक मोती
बूँदें!
आँखों से टपकें
मिट्टी हो जाएँ।
आग से गुज़रें
आग की नज़र हो जाएँ।
रगों में उतरें तो
लहू हो जाएँ!
या कालचक्र से निकलकर
समय की साँसों पर चलती हुई
मन की सीप में उतरें
और
मोती हो जाएँ|


bahut khubsurat prastuti…. aur bahut pyari kavitae.
इश्क कविता बहुत प्यारी है….. जिस तरह लेखिका ने उसे अप्ने भावो से सजाय है वो मन को छु जाता है.
या कालचक्र से निकलकर
समय की साँसों पर चलती हुई
मन की सीप में उतरें
और…………………. जीवन का अनन्त आन्नद….
very nice poems….. congratulation to MEENA ji
मीना जी की कविताये बहुत भावनात्मक है /
अच्छा लिखतीं हैं मीना जी …..!!