महिला-अधिकारों या समान अधिकारों की सारी बातें तब तक खोखली हैं जब तक महिला को याने मां बहन और पत्नी के परिवार की आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी का स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक वह स्वयं में एक निर्णायक... (Continue reading)
नोर्थ केरोलिना विश्वविद्यालय, अमेरिका में डा.पंकज जॆन हिन्दी,संस्कृत ऒर जॆन धर्म के नये कोर्स नोर्थ केरोलिना विश्वविद्यालय, यू.एस.ए. में पढाएंगे. डॉ. जैन विश्वविद्यालय में अगस्त २००८ से विदेशी भाषा तथा साहित्य के विभाग में कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि ये विषय... (Continue reading)
आशुतोष गोवारीकर आम तौर पर लंबी फिल्में ही बनाते हैं लेकिन ‘व्हाट्स योर राशि’ बना कर तो उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दो घंटे का सिनेमा वाले आज के समय में पौने चार घंटे की फिल्म … ‘मेरा... (Continue reading)
गोरखपुर में मज़दूरों की जुझारू एकजुटता और भारी जनदबाव ने ज़िला प्रशासन को झुकने के लिए बाध्य किया गिरफ़्तार मज़दूर नेताओं की रिहाई, मज़दूरों की मांगें 10 दिन में लागू कराने के लिखित समझौते के बाद आन्दोलन स्थगित ज़िलाधिकारी कार्यालय पर... (Continue reading)
इंदौर में सम्पन ग्लोबल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में हिंदी ( हास्य) फ़िल्म ’डोंट ट्च मी’ का प्रीमियर आईनाक्स थियेटर में हुआ. इसके निर्देशक, कहानीकार, संवाद लेखन टी. मनवानी आनंद है.नगर निगम सभापति शंकर लालवानी, नायिका भारती छाबडिया, श्रीमती सुषमा शिरोमणि (महासचिव-... (Continue reading)
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में करीब ढाई महीने से चल रहे मज़दूर आन्दोलन को कुचलने के लिए प्रशासन ने फैक्ट्री मालिकों के इशारे पर एकदम नंगा आतंकराज कायम कर दिया है। गिरफ्तारियां, फर्जी मुकदमे, मीडिया के जरिए दुष्प्रचार... (Continue reading)
आँगन भीतर का आँगन जब गन्दला गया, तो एक झाड़ू बनाया, जिसके तीलें हैं सोच के, बंधा है विवेक के धागों से. बुहार दी उससे …. अतृप्त इच्छायों की धूल, कुंठाओं की मिट्टी, वेदनाओं का कूड़ा, जलन की कर्कट. झाड़ दीं उससे… विद्रूपताओं और वर्जनाओं से सनी मन की खिड़कियाँ. ... (Continue reading)
हिन्दी साहित्य में गंभीर पहचान बना चुके ´संगमन´ का 15वां आयोजन उदयपुर में 2 से 4 अक्टूबर 2009 को हुआ। नगर के समीप गांव बेदला स्थित आस्था प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित इस समारोह के सहयोगी जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ... (Continue reading)
पल्लव -गांव या बचपन के परिवेश का कोई खास असर ? उत्तर – बहुत सार्थक असर मैं आज तक महसूस करता हूं. इतना कि दिल्ली की चकाचोंध में पच्चीस वर्ष गुजारने के बाद भी मुझे लगता है कि देश में कुछ... (Continue reading)
श्रीभगवान सिंह एवं कृष्ण मोहन को प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान रायपुर । महानगरों में रहने वाले ज्ञात और प्रसिद्ध आलोचकों की जगह छोटे कस्बों के योग्य आलोचकों को प्रथम प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान दिया जाना बौद्धिक रूप से बहुकेन्द्रीयता की ओर... (Continue reading)