काली आँधी के गुज़रने के बाद उसने देखा, चाँद खुद में सिमटा रात की सिलवटों में पड़ा था. मैंने उसे थामने को हाथ बढ़ाया तो बोला, मुझे मत छुओं मुझे ग्रहण लगा है. ————————————————— प्यार को मजबूरी का कफ़न ओढ़ा सुकून से सुलाया था, दुनियादारी की हवा उस को उड़ा ले गई और मेरी... (Continue reading)
कोलकाताः विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए अम्बेडकर सम्मान प्रदान किये गये। डॉ.अभिज्ञात को अम्बेडकर उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के चेयरमैन डॉ.धर्मेन्द्र कुमार ने प्रदान किया। दो दशकों से पत्रकारिता कर रहे डॉ.अभिज्ञात... (Continue reading)
सीकर. गुजरात सांसद मुकेश गढ़वी ने कहा है कि केसरीसिंह बारहठ व्यक्ति नहीं विचार थे, उनके जीवन का प्रत्येक पहलु प्रेरणादायक है। गढ़वी शनिवार को श्री करणी चारण छात्रावास परिसर में ठा. कल्याणसिंह कविया की अध्यक्षता में आयोजित क्रांतिवीर केसरीसिंह... (Continue reading)
उदयपुर। कल्पनाशीलता का पुराना युग समाप्त हो गया है और अब इसकी आंशिक संभावना गद्य में ही दिखाई दे रही है। तथ्य के प्रति बढ़ रहा आकर्षण बताता है कि पाठक अब ठीक-ठीक जानना चाहता है। यही कारण है कि... (Continue reading)
उन्नीसवीं सदी के प्रसिद्ध समाजशास्त्री हरबर्ट स्पेंसर ने शायद सबसे पहली बार आधिकारिक तौर पर सामाजिक परिक्षेत्र में योग्यतम की उत्तरजीविता के मुहावरे का प्रयोग किया था। उनका मानना था कि ग़रीब लोग आलसी होते हैं, काम नहीं करना चाहते... (Continue reading)
घोटाला करना आजकल हमारे पारिवारिक गौरव का अविभाज्य अंग हो गया है. आधुनिक घोटालावादी संस्कृति के राष्ट्रीय प्रवर्तकों ने इसके सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पक्ष को इतनी मजबूती और गरिमा प्रदान कर दी है कि अब किसी भी देशभक्त के... (Continue reading)
दिन, महीना, साल (वर्ष) यह सब तो समय को मापने के तरीके हैं । लेकिन प्रकाश वर्ष समय मापने की इकाई नही है । प्रकाश वर्ष (light year) दूरी मापने की इकाई है । जैसे कि दूरियों को हम मीटर,... (Continue reading)
दिवाकर पत्नी से दुखी रहनेवाले किंतु दांम्पत्य से संतुष्ट व्यक्ति हैं.एक ही बेटा है जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हैदराबाद में रहता है. दिवाकर की तकलीफ़ है कि करुणा मोबाईल पर ही टिकी रहती है सारा समय.हालांकि तसल्ली की बात... (Continue reading)
(मशहूर फ़िल्म आलोचक कल्पना विश्वास द्वारा लिया गया इंटरव्यू) 1. जनाब घटक, फ़िल्मों में आने की प्रेरणा आपको कंहा से मिली? उत्तर- आप कह सकते है की टॆढे- मेढे रास्ते से मैं फ़िल्मों तक पहुंच गया. अगर मेरे पिता का बस चलता... (Continue reading)
भारतमाता को बचाओ……..भारतमाता को बचाओ जुलुस में मैं भी शामिल हो गया,रास्ते में कई नेताओ,अभिनेताओं की टोलिया जुलूस में शामिल होती गई,सब सुर में सुर मिला रहे थे “भारतमाता को बचाओ ” ज्यों-ज्यों नारों की गूंज बडती जा रही थी त्यों-त्यों... (Continue reading)