सत्य के प्रयोगों की फिल्म- ’डोंट टच मी’

dont-touch-meडोंट टच मी’ फिल्म की निर्माण प्रक्रिया -
कालेज में पढाई के दोरान कविता लेखन द्वारा समाज परिवर्तन की बड़ी  उम्मीदे थी,ये विचार था की कविता भी समाज में क्रांति ला सकती है,यह विचार दिवा स्वप्न ही साबित हुआ क्योंकि लोगो की कविता में वो रूचि ही नहीं रही, इश्क मोहब्बत की कविताये तो लोग फिर भी झेल लेते है पर सन्देश देने वाली कविताये कौन सुनता है. तब चार साल पहले यह सोचा की क्यों न नाटक के माध्यम से अपनी बात कहीं जाय. कई नाटको का मंचन किया, जिसमे अपनी बात को हास्य में लपेट कर पेश किया ताकि गोली भी लगे पर लगती दिखे नहीं पर ये  माध्यम भी सिमित लोगो तक पहुँच पाता था,तक एक मंचित किये नाटक पर फिल्म बनाने का निश्चय किया,मुंबई मिरर में छपी एक न्यूज़ जिसमे बताया गया था की कैसे एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को आज़ादी के बासठ वर्षो बद भी सेनानी का प्रमाण पत्र लेने के लिए ठोकरे खानी पढ़ रही है, इस प्लाट को  गांधीजी के आदर्श की ‘लक्ष्य के साथ-साथ लक्ष्य प्राप्ति के साधन भी सही होने चाहिए’ को जोड़ कर फिल्म का निर्माण शुरू हुआ, फिल्म का मुख्य पात्र किसी को जब छूता है तो हाथ लगने वाला व्यक्ति सच बोलने लगता है.
एक नेता का किरदार था जो पहले तो देश भक्ति की बड़ी  बड़ी  बाते करता है पर मुख्य पात्र सत्यानन्द जी का हाथ लगते ही मन की अंदर का काला सच बाहर आ जाता है,यह रोल जिस कलाकार के लिए सोचा गया था उसकी अनूपस्थिति में मुझे ही करना पढ़ा, शुटिंग के दोरान मेरे सिन को आखरी में ही शूट करते थे, जो लगभग एक ही शोट में शूट किये गए है, एक शूट की में चर्चा करना चाहुंग जिसमे द्रश्य ये था की एक कबूतर नायिका का पत्र लेकर नायक की तरफ उड़ता  है इस शूटिंग के लिए दस कबुतरो को लाया गया था, पर जब हम एक कबूतर को नायक की और उडाते तब वह नायक की और न जाकर दूसरी और चला जाता था,काफी प्रयत्न विफल रहे, तब गाँव के एक लड़के ने बताया की बाकि कबूतरों को नायक के पीछे कुछ दुरी पर रखे, ऐसा किया गया तो अकेला कबूतर नायक के पीछे बेठे कबूतरों  की और जाने लगा हमारा मकसद पूरा हुआ. इससे इस बात का भी पता लगा की कबूतर भी अपने समूह में ही रहना पसंद करते है न की सिर्फ इंसान ही.

फिल्म निर्माण प्रसव पीडा से भी अधिक कष्ट दाई है,एक बार आपने जैसे तैसे फिल्म बना भी ली तो उसे लोगों तक पहुचाना भागीरथी को प्रथ्वी पर लाने के समान है.

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 निर्माता/निर्देशक- टी. मनवानी आंनद

 

 episode@rediffmail.com

 

 

 

 

 

 

 

 

 

      

           

10 Comments

  1. kiran sachdeva says:

    congratulation to your upcoming film ‘don’t touch me’

  2. vimal shah says:

    आपकी प्रयाशों को भगवान सफल बनायें और आपकी फिल्म लोगो को पसन्द आये. हमें भी यह फिल्म देखने का मौका मिले तो खुशी होगी. गुज्ररात में कब रीलिज होगी बताय. विमल शाह

  3. t manwani anand says:

    shighra hi dONT TOUCH ME film bharat ke chuninda shahron me pradarshit ki javegi,aapki shubhkamnao ke liye dhanyvaad-t manwani anand

  4. Aakash Santorai says:

    T. Manwani ji ko dhero badhai. aakhash

  5. Chirag Chill says:

    dONT TOUCH ME dekhne ki dili icha hai…. film ki publicity kare.

  6. lot of conratulation to ur cu coming film. Beat of luck.

  7. Girish says:

    best wishes to u and your team. i will watch ur movie. thks

  8. Gulshan says:

    आप ने ये महत्वपूर्ण काम किया है. मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें. गुलशन

  9. संगीता says:

    आखर पर आपके व्यंग पढे थे अब पता चला की आपकी फिल्म भी आ रही है. सबसे पहले इस नाचीज की बधाई कबुले. मैंने भी फिल्मों के लिये गाने लिखने की कोशीश करती हूं. आप से गुजारीश है की आप उन्हें पढे और भविष्य में काम में ले. मैं जल्द ही अपना ब्लोग शुरु कर रही हूं . आप वंहा भी मेरे गीत पढ सकते है. फिल्म के लिये एक बार फिर ढेरों बधाईयां. संगीता.( sangeeta

  10. sajjad says:

    dont touch me ke liye badhai aapko aur aapke parivar ko.

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