मुनाफा मानसिकता के कारण ‘स्वाईन फ्लू’
स्वाईन फ्लू के संक्रमण की शुरूआत मैक्सिको के ला ग्लोरिया समुदाय से हुई है. इस समुदाय के लोगों ने डाक्टरों को एक दो महीने पहले ही सांस में तकलीफ की शिकायत की थी. वहां के निवासियों को शुरू में लगा कि संभवतः ऐसा प्रदूषण के कारण हो रहा है. लेकिन उन्हें इस बात की आशंका थी कि इस प्रदूषण की समस्या बगल में चल रहे सूअर फार्म के कारण है. यह फार्म अमेरिका की एक कंपनी स्मिथफील्ड फूड्स के साथ एक ज्वाईंट वेंचर है. ला ग्लोरिया के लोगों ने इस सूअर फार्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और धरने दिये ताकि स्वास्थ्य में आ रही इस गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार कोई कार्रवाई करे. लेकिन कार्रवाई करने की बजाय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी. प्रदर्शन कर रहे नेताओं को गोली मार देने की धमकी दी गयी.
मैक्सिको में पैदा हुई यह बीमारी अब अमेरिका और न्यूजीलैण्ड को अपने चपेट में ले रही है. बर्ड फ्लू की ही तरह स्वाइन फ्लू के केन्द्र में मांस उद्योग का कारोबार है. पांच साल पहले जब एमएनएसआई बर्ड फ्लू का संकट आया था तो विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े संगठन आर्गेनाइजेशन फार एनिमल हेल्थ ने कहा था कि भविष्य में ऐसी महामारी न फैले इसके लिए हमें बचाव के उपाय करने होंगे. लेकिन मैक्सिको में फैले स्वाइन फ्लू पर इस घोषणा का कोई असर नहीं हुआ. साफ है वैश्विक रणनीति लचर है.
स्वाईन फ्लू के साथ मुश्किल यह है कि इसके जीन में सूअर, पक्षी और मनुष्य तीनों के इंफ्लूएंजा स्ट्रेन पाये जाते हैं. इसका संक्रमण मनुष्य से मनुष्य में होता है इसलिए इसका फैलाव बहुत तेज होता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि इस फ्लू का प्रसार किस जगह से शुरू हुआ. इसका कोई निश्चित पता तो नहीं है लेकिन ऐसा समझा जाता है कि मैक्सिको और अमेरिका का मांस फार्मों से इसकी शुरूआत हुई है. उत्तर अमेरिका में जो मांस फार्म हैं उनके बारे में विशेषज्ञ पहले से ही चेताते आ रहे थे. अपनी पूर्व सूचनाओं में उन्होंने अंदेशा जताया था कि इन फार्मों में इंफ्लूएंजा के ऐसे वायरस विकसित हो रहे हैं. साईंस पत्रिका ने तीन साल पूर्व एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि फार्मों का बड़ा होना, एकसाथ इतने सूअरों को एक जगह रखना और वैक्सीन के परस्पर उपयोग के कारण भविष्य में ऐसे वायरस विकसित हो सकते हैं जो इंसान के लिए खतरनाक साबित होंगे. अमेरिका स्थित सेंटर फार डीजीज कन्ट्रोल एण्ड प्रिवेन्शन ने हाल में ही एक रिपोर्ट प्रकाशित कर कहा था कि ऐसे वायरस को लेकर इन फार्मों में कोई निगरानी तंत्र नहीं है. कमोबेश यही स्थिति मैक्सिको में है.
असल में मैक्सिको में जो हुआ वह अमेरिकी पूंजीवाद के प्रभाव के कारण हुआ. जब प्रदर्शकारी उस सूअर फार्म के जांच की मांग कर रहे थे तो अमेरिकी फूड कंपनी स्मिथफील्ड ने मैक्सिको सरकार पर दबाव डालकर प्रदर्शनों को रोकने का प्रयास किया. लेकिन जब बात बिगड़ गयी और लोगों के स्वास्थ्य की जांच हुई तो 3000 लोगों के इस समुदाय में 60 फीसदी बीमारी के चपेट में पाये गये. अंततः 27 अप्रैल को मैक्सिको की फेडरल सरकार ने यह स्वीकार किया कि स्वाईन फ्लू फैल चुका है. मैक्सिको में जो स्वाईन फ्लू फैला है उसको केवल सूअरों तक सीमित रखना बहुत बड़ी गलती होगी. इंडोनेशिया आदि देशों में मुर्गी फार्म सूअर फार्मों से बिल्कुल सटे बताये जाते हैं. इसलिए इसमें शक की गुंजाईश नहीं है कि मुर्गों में भी स्वाईन फ्लू के स्ट्रेन का स्थानांतरण न हुआ हो.
सब कंपनियों का कमाल है
स्वाईन फ्लू का मामला न पहला है न आखिरी. कंपनियों की मुनाफा मानसिकता के कारण इंसानियत ऐसे संकटों से दो चार होती आयी है और होती रहेगी. लोगों की जिंदगी को दांव पर लगाकर कंपनियां अपने मुनाफे की चिंता करती हैं. जिंदगी के साथ खिलवाड़ उनके पेशे की प्रवृत्ति है. जिस स्मिथफील्ड फूड्स कंपनी के कारण मैक्सिको में स्वाईन फ्लू की शुरूआत हुई है उसके फूड फार्म रोमानिया में भी हैं. लेकिन एक साल पहले जब रोमानियां के स्वास्थ्य अधिकारी उसके फार्म की जांच करने गये तो उसने अंदर घुसने से ही रोक दिया. निश्चित रूप से यह अमेरिकी पूंजीवाद की दादागीरी थी. इसी स्मिथफील्ड कंपनी ने हाल में ही चीन की सबसे बड़ी एग्री बिजनेस कंपनी काफको को खरीद लिया है. साफ है यूरोप और अमेरिका से निकल अब यह फूड कंपनी एशिया में अपना विस्तार करना चाहती है.

hum sabko milker ladna chahiye is bimari se…
हम सब को पब्लिक लीतीगेशन का सहारा लेना चाहिये ताकि अपनी बात को पब्लिक तक पहुचा सके /