अपील-’अपनी राष्ट्रभाषा और जनभाषा हिन्दी को बचाओ’

hindi_bhashaमहाराष्ट्र विधानसभा के नये सत्र के पहले दिन मनसे के विधायकों ने मराठी भाषा के नाम पर ,हिन्दी में शपथ लेने वाले सपा विधायक अबू आजमी के साथ जो गुंडागर्दी की है. उसकी जितनी निन्दा की जाय कम है, ये न केवल भारतीय संविधान का अपमान है बल्कि हिन्दी भाषा के लिये यह बहुत बडा खतरा बन गया है.उस भाषा के लिए जो देश के लाखों- करोडो लोगो की अपनी भाषा है. आज जब अंग्रेजी हमारी भाषाओं के लिये खतरा बन गई है, उस समय सभी भारतीय भाषाओं को मिलकर इसके खिलाफ़ लड्ना चाहिये. इस तरह की हरकतें न केवल हमारी अखंडता और एकता में अनेकता को खत्म कर रही है. साथ ही जनसामान्य के बीच खाई भी पैदा कर रही है.

राज ठाकरे का ये राजनीतिक अवसरवाद जो मराठी जनसामान्य में मराठी अस्मिता तथा रोजगार हस्तांतरण के नाम पर खासकर नौजवानों को गुमराह कर रहा है जो आज बेरोजगार है और अपने अस्तित्व की लडाई लड रहा है. और अबू आजमी जैसा भ्रष्ट नेता भी हिंदी पर राजनीति कर रहा है. इन राजनीतिक निहितार्थो को समझे बिना हम हिंदी को सही अर्थो में उसका मुकाम नहीं दिला सकते.
चार विधायकों को बर्खास्त करना ही काफ़ी नहीं है. आज मुम्बई की सडकों और लोकल ट्रेनों में महाराष्ट्र के बाहर के लोगो के साथ ये भाषाई और अवसरवादी राजनीति करने वाले लोग जो कर रहे है. उसे भी रोका जाना चाहिये.

हम ’आखर’ के मंच से भारत की जनता से अपील करते है की इस भाषाई और क्षेत्रीय राजनीतिक अवसरवाद के खिलाफ़ एकजूट  हो और अपनी आवाज बूलंद करें.

‘आखर’ के मंच से हम भारत के प्रधानमंत्री माननीय डां मनमोहन सिंह तथा अशोक चव्हाण को एक लिखीत ज्ञापन देंगे और अपील करेंगे की इस तरह की देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए. आप सभी से अपील करते है की ’आखर’ के इस आन्दोलन में अपना सहयोग दे. अपने प्रतिक्रिया, विचार, राय और सुझाव हमें भेजें. हम उन्हें अपने ज्ञापन में शामिल करेंगे.

अपनें सुझाव और विरोध आप हमें  भेज सकते है या फ़िर ’आखर’ की पोस्ट पर  लिखे दें.

चन्द्रपाल सिंह, टी.मनवानी आनद, देव कुमार झा, देवेन्द्र सिंह, प्रीति सिंह, सोहन शर्मा,
मुम्बई.
Email – chandrapal@aakhar.org , episode@aakhar.org
Website- http://aakhar.org

69 Comments

  1. See – Chitthacharcha

  2. देव कुमार झा says:

    बांटो और राज करो… हिन्दुस्तानियो पर राज करना हो तो उन्हें कभी एक साथ मत आने दो उन्हें टुकडो में तोड़ो कहने को यह बात सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी के राबर्ट क्लाइव ने कही मगर यह बात आज भी हम हिन्दुस्तानियो के लिए सत्य है | पहले अंग्रेजो ने हमारी संप्रभुता पर चोट की और अब यह ज़िम्मेदारी हमारे राजनितिक दलों ने थोडी थोडी बाँट ली है | आजाद भारत में राजनीति का स्तर गिरते गिरते आज अपने सबसे बुरे हाल में है| महाराष्ट्र की राजनीति का सच भले कुछ भी हो मगर आम मुंबईकर के लिए गाहे बगाहे प्रतिनिधि चुनते समय कोई अच्छा विकल्प है नहीं | कांग्रेस मनसे को सिर्फ शिव-सेना को तोड़ने के लिए अपने राजनितिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर चुकी है सत्ता प्राप्त हो चुकी है और अब फ़िलहाल कोई चुनाव है नहीं| मनसे के पास भी अपने आप को सुर्खिओं में रखने के लिए कोई और रास्ता है नहीं, वहीँ समाजवादी पार्टी जो मुंबई में खुद को उत्तर भारतियो का रहनुमा बनाने पर तुली है | अस्तित्व की लडाई में एक दुसरे से लड़ भीड़ रहे राजनितिक दलों की मारामारी में जल रहे आम मुम्बईकर का क्या दोष…|
    पहले राज ठाकरे के गुंडों की मार पीट और फिर उसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्य-कर्ताओं का सड़क पर हिंसक प्रदर्शन | उसपर मूक राज्य सरकार… जनता को खुद की समझना होगा की विरोध की राजनीती को सिरे से दर-किनार करना ही उसके पक्ष में है…

  3. Ashish says:

    खुशदीप जी,महाराष्ट्र मे हिन्दी को लेकर आम जनता को कोई समस्या नही है| आप महाराष्ट्र मे कही भी जायेँ, हिन्दी मे बात करे, जिसे हिन्दी बोलते नही आती वह आपको मराठी मे जवाब देगा लेकिन आप क्या कह रहे है वह समझ जायेगा| किसी को शीकायत है तो वह है राज ठाकरे नामका गुण्डा|ऐसे भी कल जो कुछ हुआ वह राज ठाकरे और अबू आजमी की व्यक्तिगत खुन्नस ज्यादा है| अबू आजमी के बाद २ विधायको ने हिन्दी मे, एक विधायक ने अँग्रेजी मे, २ विधायको ने सन्स्कृत म शपथ ली| उन्हे कोई कुछ नही बोला|राज ठाकरे जैसे गुण्डे को शायद यह मालूम नही कि महाराष्ट्र मे गोण्दिया नाम का एक शहर है जिसकी नगर पालिका पुर्णत: हिन्दी मे काम करती है| विदर्भ के अधिकतर जिलो/नगरो मे मराठी कम हिन्दी ज्यादा बोली जाती है|
    मै कर्नाटक, केरल और तमिळनाडू मे भी रहा हूँ| तमिळनाडू मे पूरे ५ साल| चेन्नई/मदूरै जैसी जगहो पर मैने खुलकर हिन्दी प्रयोग की, मुझे टूटी फूटी हिन्दी मे ही सही लेकिन जवाब मिला| आज वहाँ भी लोग हिन्दी सीख रहे है, स्कूलो मे नही तो प्रायवेट सस्थानो मे| हिन्दी फिल्मे अच्छा व्यबसाय कर रही है|
    कुल मिला कर यही कि हिन्दी थोपे नही, लोगो को हिन्दी परिवार मे सम्मिलित करे तभी हिन्दी का भला होगा|

  4. Hindi is only language of Northern India. Hindi isn’t having acceptance in entire India (Especially in South and Northeast). The language of Maharashtra and Marathi Manus is only Marathi. Rajsaheb is doing the prefect thing and entire Maharashtrian community is with him. He is the hero of Marathas. And by the way why the outsiders are using there pressure on Marathi people and not on south Indians. Atleast we have a hindi subject in school but what about south??? There is no Hindi even in School. And somebody should try like Abu Azhami in any of south Indian state then they will know exactly what happens. JAI MAHARASHTRA!

  5. ram singh ashiya says:

    देखो आज, राज गुंडों का राज,किया महाराष्ट्र को शर्मशार !

    हिंदी कर रही है अपने ही घर मै अभी तक बसने का इंतजार !!

    कभी धर्म के नाम पर,कभी राज्य के नाम पर होती है राजनीति !

    कलंक लगा दिया शिवाजी की धरती को,किया माँ हिंदी का अपमान’!!

    माना की हर घर मै होता है हर किसी का सम्मान , !

    मगर ये तो नहीं की हम हमारे लिए करे माँ का अपमान !!

    अपनी भाषा है सबको प्यारी,लेकिन हिंदी तो माँ है हमारी !

    जो करे माँ का अपमान, वो कैसा अपना, वो कैसा इन्सान !!

    आखिर बार बार क्यों करता है इन्सान गलत पहचान !

    क्यों जगाता है राज जैसा शेतान, और करता है माँ का अपमान !!

    हम सब मिलकर ले एक शपथ ,करे राज का सत्या नाश !

    आखिर हम कियो कहते है बार बार की ये है बोम्बे मेरी जान !!

  6. मनसे ने हिंदी का नहीं राष्‍ट्र का अपमान किया है और संविधान को तार-तार करने की कोशिश की है। शर्म की बात ये है कि हुक्‍मरान इस तमाशे को इस तरह देखते रहे जैसे किसी तबायफ का मुजरा चल रहा हो।

  7. Kusum Thakur says:

    मेरी मातृभाषा हिंदी नहीं है पर एक बात जरूर है हन्दी राष्ट्र भाषा है और मुझे उससे बहुत ही प्रेम है और रहेगा। दुःख तो इस बात की है कि अभी भी आम नागरिक इन नेताओं को और इनके राजनीति को नहीं समझ पाए हैं । ये न अपने देश की हित की सोचते हैं, न ही अपने राज्य या राज्य के नागरिक की, ये तो मात्र अपने विषय में सोचते है। कैसे गद्दी बरक़रार रहे मात्र इतना ही सोचते हैं । हम आम नागरिक अब भी यदि न सोचें तो पता नहीं ये और कितने गर्त में इस देश को ले जायेंगे । हम आम नागरिकों को इनसब से परे होकर अपने राष्ट्र को बचाने की सोचना चाहिए अपने राष्ट्र भाषा को बचाने की सोचना चाहिए । हमें जाति धर्म भाषा से परे होकर एक जुट होना चाहिए और अपने देश के हित के विषय में सोचना चाहिए ।

  8. नमस्ते
    मैंने हिन्दी पर आपकी मेल देखी,मैं आपकी बात से इतफाक रखती हूँ और अपना नाम भी आप सबके साथ विरोध में शामिल करती हूँ ,ये वाकई बहुत दुखद है और मैं तो मुंबई कवि सम्मेलनों में इसके विरोध में कविता भी पढ़ती हूँ और लोगों से इल्तजा भी करती हूँ लेकिन अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता और ये राजनीति है ;पता नहीं इन सबकी हकीक़त क्या है और कौन कौन शय देता है क्योंकि जब तक ऊपर से शय न मिले ये सब होना मुश्किल है ;आप जो चाहें में इस आन्दोलन में आपका साथ देने को तैयार हूँ ;
    ये मामला उठाने के लिए धन्यवाद्

  9. चंद्रपाल जी,
    आपकी मेल मिली। मैं इस पोस्‍ट में टिप्‍पणी के रूप में आपके अभियान का समर्थन और राज ठाकरे की महा नकचढ़ी सेना की गुण्‍डागर्दी का विरोध जताता हूं। आप ज्ञापन में मेरा नाम शामिल कर लें।

    ये महाराष्‍ट्र के हित के नाम पर जनता को बांटने वाली हरकतें करते हैं और सबसे बड़ी बात है कांग्रेस फिर एक बाल ठाकरे को पैदा कर रही है। बाल ठाकरे ने भी ऐसे ही जन्‍म लिया था, जिसे महाराष्‍ट्र के उद्योगपतियों और कांग्रेस का पूरा समर्थन प्राप्‍त था।

  10. unfortunate, MNS wants to show the existence in assembly and this is seems to be another bhindaranwale promoted congress. abu azami is from azamgargh were all pak anti-india activities is centered.
    MNS has givem him unness. importance and MNS too has been given much more publicity for thier foolish work than constructive approach.
    Raj can provide good opposition but this type MLAs ,I am disappointed.

  11. हा, हिन्दी भाषा का अपमान नहीं होना चाहिये. अबू आजमी से झगडा हो सकता है, हिन्दी भाषा से नहीं. शिवसेना आपके साथ है.

  12. And so does Abu Azmi, Abu Azmi, who was jailed for his involvement in Bomb blast case ( later released due to the lack of evidence) His very exixtence as a politician depends on the agressive statements and stance, to alure minorities.
    He has done megre developmental work in his own constituence.
    He is a leader of minorities within minorities who … Read moreare un educated. Educated Muslims like Dawoodi Boharas detest his politics of hate and devide.
    It is possible to take oath in Marathi from a Roman or Urdu script just to avoide conflict and law & order situation.
    He has no regards for Babasaheb Ambedkar, whom he is praising so much.

  13. Their are so many issues before Govt.,which are of prime importance.MNS should fight against the price rise of important commodities & force Govt to lower down the prices

  14. Nitin Sharma says:

    Sharmayes, this kind of pilitics is for sepration.patil sahab are you not Indian. We also have constitution that give you power to take oath in any of the language. yahi hamari sabhyata hain. any one may have issue against Abu aajmi but the issue was wrong to teach him the lesson……….i am agree with sanjay raut. We all are sure about abu but hindi is the bridge among all indians. aur bhai sahab aur issue bahut hain is desh ke aage….

  15. सच कहा दोस्त .जो हो रहा है वो ठीक नहीं है….. कोई भी लडे… घायल हम हो रहे है…

  16. aaj jab bengal mein Mamta ji koi vaktavyya HINDI mein de rahi thein tab koi thappad, mukka nahi barsa.
    kya yeh ‘bhadra lok’ ka mamla hai ?
    @Vinay ji ghayal insanniyat , hmari, is desh ki insanniya(?) ho rahi, ho chuki…ab to yeh tamasha tezi se ho rha hai…par main koi marciya alaapna nahi chahtta..kyonki facebook par ek aisi sankhya bhi jee rhi hai jise india bahut shining lagta hai.

  17. Amit Tyagi says:

    bahut badhiya prayas, jitnee tareef ki jaye kam hai.

  18. Arun Pandey says:

    भाई निंदा करने से ही क्या हो रहा है ,जब-तक राज्य सरकार राज ठाकरे पर कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी ,कुछ नहीं होने वाला ,इंतजार करो जब एक और भिंडरावाला के लिए कोई बड़ी कार्यवाई देखने को मिले

  19. Abhishek Bhola says:

    yeh nindaniya vishay nahin chintaniya vishay hai ki desh ke mulya keval swarth ke abhibhoot hokar rah gaye… tathakathit neta mat ke liye rashtrabhasha ya samskriti ka apmaan kar sakte hain to aam naagrik paise ke liye desh ko hi chhod sakta hai… yahaan yuddh chahiye vivaad nahin — kaash hum laa paayen inqulaab wahi

  20. Swati Kundu says:

    Maharashtra mein jo hua, bahoot galat hua. Akhir Hindi hamari rashtriya bhasha hain. Usko bolne se koi rok nahi sakta.

  21. amar jyoti says:

    बात सिर्फ़ हिन्दी विरोध की ही नहीं है। यह भी देखना होगा कि इस व्यवस्था मे एक ओर वरुण गाँधी और राज ठाकरे जैसे लोग संसद और विधान सभाओं की शोभा ब्ढ़ाते हैं तो दूसरी ओर विनायक सेन जैसे लोगों को दो-दो साल तक ज़मानत नहीं मिल पाती और कोबाड गाँधी को जेल की सलाखों के पीछे रखा जाता है।

  22. Alok Mishra says:

    यहां बात सिर्फ अबु आजमी को पीटे जाने की नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कितने निरपराध और मासूम लोगों के साथ भाषाई और क्षेत्रता के आधार पर अत्याचार किया जा रहा है। चाहें वह रेलवे स्टेशन हो या फिर कार्य स्थान।
    इन मूर्खों को यह नहीं मालूम है कि यहीं लोग जो कि भीड़ का हिस्सा हैं और बिना कुछ प्रतिरोध के अत्याचार सह लेते हैं। इन्हीं लोगों ने आपको इस योग्य बनाया है कि आज आप अपने प्रदेश की संपंन्नता पर गर्व कर पा रहें हैं।

    मुझे ऐसा लगता है कि राज ठाकरे अपने समर्थकों में एक तरह का सामूहिक उन्माद (Mass Hysteria) पैदा कर रहे हैं और साथ में अपने समर्थकों को समाज की मुख्य धारा से अलग भी कर रहें हैं। वास्तव में राज ठाकरे को एक अच्छे चिकित्सालय में इलाज की जरूरत है और इनके समर्थकों को समाज की मुख्य धारा में लाने का प्रयास (Rehabilitation) भी करना चाहिए।

    मैं यहां यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि सैद्धांतिक रूप से मैं अबु आजमी का समर्थक नहीं हूँ। लेकिन मैं यहां की घटनाओं की घोर निंदा करता हूँ। 

    मैं इस पोस्ट के माध्यम से राज ठाकरे से अनुरोध करता हूँ कि वे अपनी आदत से बाज आएं। हमारा देश पहले से ही अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। कृपया अपनी व्यक्तिगत व्यथा के द्वारा इसे और परेशानी में न डालें। 

  23. vikram sachdev says:

    poore system main goos rahe galat saath hi usey aakramak tarike se manvane ki pravarti ko rokne ki baat hai..is liye isey laaparvahi se na choda jaye .

  24. vikram sachdev says:

    पूरे सिस्ट्म में घुस रहे गलत और साथ ही उसे आक्रामक ढंग से मनाने की प्रव्रति पर अंकुश लगना ही चाहिए.

  25. आप ने जो आवाज़ उठाई है–मैं आप के साथ हूँ ..
    गलत के विरुद्ध मैं हमेशा खड़ी हूँ ..

  26. Asha says:

    विधानसभा पहले सत्र में जो भी हुवा वह शर्मनाक घटना है. और हम सभी को इस बाद से सक्त नफ़रत है.
    मैं इस बात से बिनकुल सहमत हि कि हिंदी हमारी राष्टभाषा है. लेकिन ये जनभाषा कैसे हुवी. ? हिदुस्थान कि १०० करोड कि जनता हिंदी में बात नहि करती. हमे गर्व है कि हिंदी हमारी राष्टभाषा है. ये बात सिर्फ़ बोलने कि लिये है.
    लिकिन कितने लोग इसका उपयोग करते है. क्या हम अपने सारे कामकाज हिंदी मै करते है. हम सबको अग्रेजी से बहोत लगाव है. आज हम अग्रेजी का प्रयोग ज्यादा करते है. हर घर में अग्रेजी घर कि भाषा बनी है. बहोत से लोगो को शर्म आती है अपनी भाषा मै बात करने कि लिये. कुछ सालो के बाद तो हम अपनी भाषा भुल जायेगे. इसके लिये जिम्मेदार कोन है.
    माना कि हिंदी राष्टभाषा है. लेकिन महाराष्ट के गावो में हिंदि नहि बोली जाती. वहा स्थानिय भाषा मैं संवाद होता है. और होनाभी चाहिए क्योकि मराठी हमारी भाषा. महाराष्ट के सिवा एसे अनेक जिले जहा अपने पने प्रांत के भाषा मे बात कि जाती है. तो क्यो हम नहि. क्या महाराष्ट के लोगो को अपनी भाषा में बात करने का अधिकार नहि है. और ये बात सभी प्रांतो कि लिये.
    अगर हमे अपनी राष्टभाषा बचानी है तो इसके लिये सक्त कदम उठाने जरुरी है.

  27. कवि कुलवंत says:

    न हिंदी को मराठी से खतरा है न मराठी को हिंदी से.. खतरा है तो बस इन राजनीतिज्ञों से..

  28. Dr. Prem Janmejai says:

    आपने बहुत ही सार्थक अभियान छेड़ा हुआ है, इसमें आप मुझे महत्वपूर्ण मुद्दों पर साथ ही समझें।

  29. chandrika.media says:

    yah ek nindaniy ghatana hai par tathyatmak taur par aapko soochit karana chahoonga ki hindi hamari rashtra bhasha nahi hai aur rashtra ke nirman ki is prakriya me bharat jaise bahubhashi desh me koi ek rashtra bhasha nahi ho sakati. par yah sansadiya lokatantra ke ek aur ghinaune svaroop ko ujagar karne wali ghatana hai.

  30. मैं व्यक्तिगत रूप से आखर का आभार प्रकट करता हूँ की “आखर” ने इस भाषा और क्षेत्र के नाम पर हो रही राजनीति के ऊपर आवाज़ उठाया है. इस लडाई में आखर को मेरा सम्पूर्ण समर्थन है. इन नेताओं को तत्काल बर्खास्त कर इन पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए ताकि इनके अनुयायिओं को शीघ्र एक सीख मिले.

  31. jitendra dave says:

    बेशक राज ठाकरे और उनकी पार्टी के विधायको का यह काम शर्मनाक है. लेकिन अबू आजमी की करतूते भी प्रशंसनीय नहीं हैं. वह गाहे-ब-गाहे भड़काऊ बयान देकर मुम्बई में मराठी भाषी और हिन्दी भाषी लोगों के बीच विद्वेष फैलाते रहते हैं. अब तक का इतिहास यही बताता है की १० में से ८ बार अबू आजमी ने राज ठाकरे को छेड़कर जानबूझकर उकसाया है. इसके बाद खुद तो कमांडो और भारी सुरक्षा में सुरक्षित हो जाते हैं लेकिन हमारे जैसे आम हिन्दी भाषी सड़को पर मार खाते हैं. आज तक आजमी ने ऐसा कोइ भी काम नहीं किया है जिससे उत्तर भारतीयों का असली मायनो में भला हो. उन्होंने अपने बयानों और कामो से मुश्किलें ही खड़ी की हैं. दूसरी और कोंग्रेस की सरपरस्ती में राज ठाकरे नित-नए ‘पराक्रम’ करके मराठी मानूस का कौनसा हित साधने वाले है यह ईश्वर ही बता सकता है. चाहे जो भी हो वोट के इस खेल में मराठी और हिन्दी भाषी जनता के बीच खाई पाटनी जरूरी है, वरना यह मुम्बई ही नहीं देश के लिए भी अहितकर होगा. और कम से कम राज या आजमी से यह उम्मीद नहीं कर सकते. क्योंकि दोनों ही अपनी राजनीतिक रोटिया नफ़रत के चूल्हे पर ही सेंकते हैं.
    Jitendra Dave, Mumbai

  32. anamika kumari says:

    अफ्शोश कि बात है कि सब ने मराठी भाषा हिन्दी भाषा या फिर हिन्दू मुस्लिम को लेके अपने अनमोल राए दी ..पर क्या किसी ने ये सोचा कि ये कि politician संविधान या फिर राजनीति का आड़ लेके हम आम जनता यानि mango people को nuksaan पहुंचा रहे हैं….इन सब मामलो के चलते खामियाजा हम आम लोगो को भुगतना पड़ता है .;….इस बात से हम सब वाकिफ थे कि ये सब सोची समझी हुई साजिश थी अपने अपने सता को बरकरार रखने के लिए……मेरी सभी politician से मेरी हाथ जोड़कर विनती है कि कब तक आपके आपसी भेद भावः का खामियाजा हम आम लोगो को भुगतना पड़ेगा…हम सब एक हैं ..हम सब हिन्दुस्तानी हैं …..ये क्यूँ हम सब भूल जाते हैं……..भारत माता कि जय हो …जय हिंद …….
    धन्यवाद .
    अनामिका कुमारी
    live india
    मुंबई

  33. मैं कवि कुलवंत की बात से बिलकुल सहमत हूँ

  34. santosh patil says:

    1. So far 8 PMs (Nehru, LB Shastri, Indira Gandhi, Charan Singh, Rajiv
    Gandhi, VP Singh, Chandra Shekhar, AB Vajpayee) have all come from UP.

    WHY they could not develop it since independence?

    2. HOW come so called ‘communal’ CM of Gujarat has been able to achieve highest rate of growth in the country within a span of 5/6 years but not the ’secular’ CMs of UP/Bihar who ruled for more than 15/16 years?

    3. UP/Bihar are amongst richest states in terms of natural resources.

    WHY then TATAs, BIRLAs or any other industrialists not keen on setting up
    large industries there, even though labour is also cheaply available ?

    4. Amar Singh of Samajwadi Party always accompanies top celebrities /industrialists, prominent being Anil Ambani.
    WHY he could not convince them to invest in his state? Only Anil Ambani is investing something…but that’s because he’s promised free land.

    5. Its a fact that maximum number of Babus (IAS/IPS etc officers) come from UP/Bihar.
    WHY then these states still remain backward? Because they and their Netas dont want to uplift their backward state so as to rule indiscriminately.

    6. Bihar CM Nitish Kumar claims that North Indians contributed to the
    Development of Mumbai.
    WHY they do not contribute for their own state’s development?
    Why are Patna / Dhanbad the shabbiest cities in the world? (Mumbai may join them soon)

    7. 36 north Indians were burnt alive in Assam.
    WHERE were Sanjay Nirupam, Abu Azmi, Mulayam, Amarsingh, Laloo, and Nitish Kumar at that time?

    8. Bihar had maximum number of railway ministers.
    WHY then their recruitment is done from Mumbai?

    9. Its a fact that where there’s money/opportunity, people from different geo/demography rush-in to make fortunes. Mumbai is one such city.
    Gujratis, Marwaris, South Indians, Bengalis, Punjabis, Sindhis flocked to Mumbai for obvious reasons.
    Majority of these communities got into skilled, professional, business areas and prospered, contributing to Mumbai’s success.

    However, most of the North Indians resort to and take pride in doing
    Unskilled/unlawfull cheap labour such as illegal hawking by occupying every nook & corner of every footpath, station areas as vegetable/fruit/sing-chana/bhel-pani puri vendors, or auto/taxi wallas
    Without licenses.

    They bribe local authorities and make life of common people miserable due to congestions and rubbish.

    They are ruining the tax payer’s money. Of course not to mention about illegal slums.

    It is absurd to say that they contributed to Mumbai’s development. If
    Anything, they are retarding/deteriorating Mumbai.

    CAN our great leaders dare say that Middle-east countries especially Dubai got developed due to laborers from India?

  35. kalesh says:

    Well to start with The Question – ‘Is this going to change anything?’ Are any of the proponents of the so called language and religion brigade anytime interested in what can be done for their country, state, region, district or at least the locality in which they live? Well looks like the answer most likely is ‘No’. Does anybody really feels that Mumbai is the city it is today because of some political party or any particular leader? Tough call to make. The infrastructure and the road and the illegal construction and the plight of millions of Mumbaikars speak a very different story. It is such a pity that the single most largest financial contributor to the Central treasury has to languish in its own misery with it finances in total disarray. Why don’t these political parties have one single agenda – REMOVE CORRUPTION. I guess all the other problems will take care of itself. Nobody is interested since 5 years is all they have and are interested in. Congress ruined a decade’s rule with zero noticeable contribution to  Mumbai – THE financial capital of India. But hey!! discussions are a must in Democracy…so let it flow:)

  36. प्राण शर्मा, यू.के. says:

    पहले अपनी बोली बोलो
    फिर चाहे तुम कुछ भी बोलो
    इंग्लिश बोलो ,रूसी बोलो
    तुर्की बोलो ,स्पैनिश बोलो
    अरबी बोलो ,चीनी बोलो
    ज़र्मन बोलो, डेनिश बोलो
    कुछ भी बोलो लेकिन पहले
    अपनी माँ की बोली बोलो

    अपनी बोली माँ की बोली
    मीठी- मीठी , प्यारी प्यारी
    अपनी बोली माँ की बोली
    हर बोली से न्यारी-न्यारी
    अपनी बोली माँ की बोली
    अपनी बोली से नफरत क्यों
    अपनी बोली माँ की बोली
    दूजे की बोली में ख़त क्यों
    अपनी बोली का सिक्का तुम
    दुनिया वालों से मनवाओ
    खुद भी मान करो तुम इसका
    औरों से भी मान कराओ
    माँ बोली के बेटे हो तुम
    बेटे का कर्त्तव्य निभाओ
    अपनी बोली माँ होती है
    क्यों न सर पर इसे बिठाओ

  37. संजीव निगम says:

    राज ठाकरे जिस तरह भाषा के नाम पर विघटनकारी राजनीति कर रहा है इसको अगर महाराष्ट्र तथा केंद्र सरकार द्वारा सख्ती से नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब राज ठाकरे इससे आगे बढ़ते हुए मराठिस्तान की मांग रख देगा. इसके पीछे कारण यह है कि उस व्यक्ति को यह लगता है कि अलगाववादी बातें उसे बिना कोई सार्थक प्रयास किये पूरे विश्व में चर्चित कर रही हैं.

  38. Abhishek Sharma says:

    हम क्या समझते हैं ??? की ज्ञापन देने से समस्या का समाधान हो जाएगा… नहीं..?? और कभी नहीं…?? आवश्यकता है भारतियों को, क्षमा चाहूँगा इंडियनस को जब तक ये समझ नहीं आएगा की हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान का अर्थ क्या है, हिन्दू संस्कृति का उद्घोष एकात्म राष्ट्रवाद या वसुधैव कुतुम्बम का क्या अभिप्राय है, तब तक यह बे सर पैर का विवाद चलता रहेगा और हम अपनी उँगलियों को कीबोर्ड पर ऐसे ही तकलीफ देते रहेंगे आवश्यकता है एक राष्ट्रवादी मिशन की, जो निस्वार्थ लोग आरम्भ करें… हम भूल रहे हैं की जिस इंसान को क्षमा चाहूँगा जिस राजनितज्ञ को हम ज्ञापन देने की बात क्र रहे हैं वो राजनीतिज्ञ उस औरत का गुलाम है जिसे स्वयं हिन्दी नहीं आती, दूसरा वो औरत उस इंसान की पत्नी है जिसने कहा था की संस्कृत कोई भाषा ही नहीं है, तीसरा जिसका पति उस इंसान का नाती है जिसने कभी हिन्दी में भाषण ही नहीं दिया और हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री बन गया…. चौथा जिसने भारतीय इतिहास को मुग़ल आक्रमण से लेकर गांधी की मौत तक सीमित कर दिया…

    तो क्या…

    मैं मानता हूँ की हम कुछ लोग इकट्ठे होकर इन लोगों के आश्वासनों से दूर एक संघर्ष करें जिसमें हम न्यायपालिका के माध्यम से इस घटना का विरोध कर कानून का निर्माण कराने का या संशोधन का प्रयत्न करें की हिन्दी का अपमान करने वाले व्यक्ति और तानाशाह राजनीतिज्ञ को उम्र भर के लिए राजनीतीक रूप से अवैध घोषित किया जाए या कुछ ऐसा निर्णय हो जिसके बाद कोई भी ऐसा अपराध न कर सके… अगर ऐसा कोई पग उठाता है तो मैं अग्रिम पंक्ति में कार्यरत हूँगा… अन्यथा ऐसे ज्ञापन हर दिन हजारों दिए जाते हैं जो क्षेत्रीय समाचार पत्रों के कोलम भरने के अलावा कुछ नहीं कर पाते, भगत सिंह ने कहा था की इन बहरों के कानो तक आवाज़ पहुंचाने के लिए धमाके की जरुरत है अतः ये लोग बहरे हैं विस्फोट के अलावा इन्हें कुछ सुनाई नहीं देगा …. जिन्हें हम नियुक्त करते हैं वो हमारे दास हैं और दास अगर ना माने तो फटकार लगानी ही पड़ती है

    एक धक्का दो रुख मोड़ दो
    एक धक्का दो झकझोर दो
    एक धक्का दो ताबड़तोड़ दो
    एक धक्का दो हर और दो……अभि

  39. Vandana Shindae says:

    Yes I agree with ‘aakhar’ !!

  40. Saroj Gupta says:

    bahut glani hoti hai ke is yug mai jab hindi sare vishv mai hamari pahachan ban chuki ha tab yha tamasha ?????

  41. Satyanarayan Patel, Indore says:

    Bhai isa sambandh me aap jo gyapan den usame meri sahamati hai, mera nam jode. plz. maine is Ghatana ke sambandh me bayan bhi diya tha. jo Ghatana ke dusare din lakhanw ke dainik jagaran me chhapa hai. use on line dekha ja sakata hai. par wah sab mujhe nahi aata. satyanarayan patel

  42. G kishore, Kanpur says:

    Mai Sahmat hoon. mera posting is sambandh mai mere blog Philhal mai hai. aap dekh saken to deken.

  43. falcrown Limited says:

    good boss,… keep it up ———

  44. Anand Rai, Gorakhpur says:

    सच कहें तो राज ठाकरे एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं. एक तरफ वे शिवसेना को ठीक कर रहे हैं और दूसरी तरफ हिन्दी और हिन्दी वालों का विरोध कर मराठियों को प्रभावित कर रहे हैं. यह उनका भ्रम है. असल में राज ठाकरे जैसों का दिमाग अमिताभ बच्चन जैसे लोगों ने खराब कर दिया. पर एक बात मानिए राज ठाकरे और उसकी सेना के लोग जो भी कर रहे हैं वह गीदडों और कायरों का काम है. उसकी नोटिस न ली जाय तो ही बेहतर है. hindi jindabad

  45. रूपसिंह चन्देल says:

    प्रिय भाई

    आपकी अपील पढ़ी – महाराष्ट्र विधान सभा में अबू आजमी के साथ मनसे के विधायकों ने जो कुछ किया उसकी मैं हृदय से भर्त्सना करता हूं. हिन्दी राष्ट्रभाषा है और इस प्रकार की ओछी राजनीति को देशद्रोह माना जाना चाहिए.

  46. Sharam ki baat hai. Jabki hamein apne HINDI hone par GARV hai. Aakhir yeh hamari MATRABHASHA haai.

  47. इस मुहीम को मेरा समर्थन है

  48. Arvind Kumar says:

    मैं आप के विचारोँ से शत प्रति शत सहमत हूँ… जितना ख़तरा हमें प्रदेश-भाषा भक्ति से है, उस से कहीँ अधिक ख़तरा है अति-हिंदी भक्तोँ से… वे समझते हैं कि हम अब भी ब्रिटिश शासन में जी रहे हैं. आज हिंदी के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रचलन वाली इंग्लिश उतनी ही ज़रूरी है जितनी अपनी ‘राष्ट्रभाषा’ हिंदी… राष्ट्रभाषा वाला भ्रम हिंदी वालों ने न जाने क्यों पाल रखा है… हमारी ढेरों राष्ट्रभाषाएँ हैं, दो राजभाषाएँ हैं – इंग्लिश और हिंदी…

  49. किसको किससे खतरा है?

    आपके शीर्षक ने मुझ इसलिए आकर्षित किया क्योंकि आपने हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ के रुप में संबोधित किया है। महोदय, हिंदी भारत की राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं। भारत शायद विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। विडंबना है कि अधिकतर लोग हिंदी को राष्ट्रभाषा समझते हैं किंतु ‘समझने’ और ‘होने’ में बहुत अंतर होता है। अभी कल के नभाटा में भी ऐसा ही उल्लेख किया गया था।

    आपने लिखा है, “….आज जब अंग्रेजी हमारी भाषाओं के लिये खतरा बन गई है, उस समय सभी भारतीय भाषाओं को मिलकर इसके खिलाफ़ लड़ना चाहिये….”

    अँग्रेज़ी से नही स्वयं से भिड़ने (आत्म-विश्लेषण) की आवश्यकता है।

    किससे लड़ाई की जाए? क्या भाषा-प्रेम थोपा जाना चाहिए? और फिर…यदि हाँ! ….तो क्या आप स्वयं पर थोप रहे हैं? बच्चे तो अँग्रेजी माध्यम वाले विद्यालयों में ही अध्यनरत होंगे! यहीं लड़ाई हार जाते हैं हम। भाषण, नारों और जलसों से भाषा का उद्धार नहीं होता ‘कर्म’ से होता है।

    …और जिन नेता लोगों की आप चर्चा कर रहें हैं उनका भाषा से कुछ लेना-देना नहीं है। मैं सात समंदर पार बैठा आपको बता सकता हूँ कि न इसके बच्चे हिंदी पढ़ते होंगे, न उसके मराठी। दंगा भड़कने पर न ये नेता मरेगा, न वो – मरेंगे कुछ हिंदी भाषी और कुछ मराठी भाषी…बस यही सत्य है!

    संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की बात तो की गई थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं, उसके स्थान पर इसे ‘राजभाषा’ का दर्जा दिया गया। अब राज करने वाले इसका कितना उपयोग करते हैं यह तो जनसाधारण से छुपा नहीं है।

    अपना राष्ट्रीय पक्षी है, राष्ट्रीय पशु है, राष्ट्रीय फल है, राष्ट्रीय गान है और राष्ट्रीय गीत भी है परंतु राष्ट्रभाषा…नहीं है। अपना देश ‘भाषा विहीन’ राष्ट्र है। मुझे यह भी खेद है कि आप जैसे अधिकतर बुद्धिजीवी व दैनिक नभाटा भी इस ‘कटु सत्य’ से अनभिज्ञ है। शायद पत्रकारिता ‘हॉलिवुड-बॉलिवुड’ तक सिमट कर रह गई है।

    नि:संदेह हमें भाषा सुधार की भी आवश्यकता है। ‘हिंदी-विमर्श’ को चाहिए कि ‘प्रैस-विज्ञप्ति’ सदस्यों को भेजने से पहले एक बार पढ़कर यथासंभव सुधार करें – इससे भाषा का हित ही होगा। इस विज्ञप्ति का शीर्षक, ( ‘अपनी राष्ट्रभाषा और जनभाषा हिन्दी को बचाव’) ‘अपनी राष्ट्रभाषा और जनभाषा को बचाएं’ या …का बचाव’ होना चाहिए था।

    राष्ट्रभाषा? काश! आपकी (लेखक की) बात सच होती! ईश्वर आपकी वाणी को ओज दे और हमारे राष्ट्र को एक भाषा। इस संदर्भ में प्रधानजी को कुछ लिखें तो मैं भी अँगूठा लगाने को तैयार हूँ।
    रोहित कुमार ‘हैप्पी’
    संपादक, भारत-दर्शन
    न्यूज़ीलैंड।

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