घोटाला करना आजकल हमारे पारिवारिक गौरव का अविभाज्य अंग हो गया है. आधुनिक घोटालावादी संस्कृति के राष्ट्रीय प्रवर्तकों ने इसके सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पक्ष को इतनी मजबूती और गरिमा प्रदान कर दी है कि अब किसी भी देशभक्त के... (Continue reading)
वे सामाजिक व राजनैतिक दृष्टि से घोषित रूप से धर्मनिरपेक्ष थे. अक्सर अखबारों में उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि फोटो समेत छपती रहती थी. शहर के प्रायः सभी धर्मनिरपेक्षता सम्बन्धी समारोहों में वे ऐसी ही प्रमुखता से सुशोभित होते थे जैसे किसी... (Continue reading)
वित् मंत्रीजी ने मार्मिक शब्दों में गुहार लगाई की देश को आर्थिक मंदी से बचाना है तो सरकारी खर्चो को बढाना होगा,सरकारी खर्चे बढाने से मार्केट में तरलता बढेगी,जनता की जेब में पैसा आएगा तो वो खर्चा करेगी इससे कल कारखाने चल पड़ेंगे,खर्चे बढाने की उनकी अपील को नेताओ ने अप्रतियाशित तरीके से हाथो-हाथ लिया,कुम्भकरण की नींद सोने वाले नेता जाग उठे,सुझावों के पुलिंदे लिए... (Continue reading)
आजादी के बाद हमने हर विधा में हद से ज्यादा तरक्की की हैं. हमारी अंग्रेजी नोलेज अंग्रेजों के अंग्रेजी नोलेज से कई गुना हैं. हमारे लल्ला-ललनाओं का अंग्रेजी भाषा प्रवाह देखकर अंग्रेज भी दांतो तले अंगुली दबाते रहते हैं तथा... (Continue reading)