दिवाकर पत्नी से दुखी रहनेवाले किंतु दांम्पत्य से संतुष्ट व्यक्ति हैं.एक ही बेटा है जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हैदराबाद में रहता है. दिवाकर की तकलीफ़ है कि करुणा मोबाईल पर ही टिकी रहती है सारा समय.हालांकि तसल्ली की बात... (Continue reading)
भूमिका ये बीसवीं शताब्दी के जाते हुए साल थे-दुर्भाग्य से भरे हुए और डर में डूबे हुए। कहीं भी, कुछ भी घट सकता था और अचरज या असंभव के दायरे में नहीं आता था। शब्द अपना अर्थ खो बैठे थे... (Continue reading)
पिताजी की चिट्ठी आई थी,माँ की तबियत कुछ खराब है,तुमसे मिलने की जिद ठाने हुए है,हो सके तो दो दिन के लिए आकर मिल जाओ…चार दिन बाद से थर्ड ईयर के पेपर शुरू होने वाले थे…मैं ऊहापोह में था कि... (Continue reading)
चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी “उसने कहा था” हिंदी कथा साहित्य में मील का पत्थर मानी जाती है। इसे नई कहानियों की शुरूआत के रूप में भी रेखांकित किया जाता है। -एक- बडे-बडे शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की जवान के कोड़ो से... (Continue reading)
“मैं केटी को ले जा सकती हूँ? सधी हुई आवाज़ कानों पर पड़ते ही सर उठाया. देखा सामने सुंदर सी, तीखे नाक नक्श, कटे हुए घुंघराले बाल जो हवा के रुख के साथ टहल रहे थे, ११-१२ साल की लड़की खड़ी थी. “आपका... (Continue reading)