लक्ष्य के साथ साथ उसे प्राप्त करने के साधन भी पवीत्र होने चाहिये. ऐसा ही कुछ सन्देश लेके आई है हिंदी और सिन्धी में बनी फिल्म डोंट टच मी. दोनों प्रदेशो के प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान देश... (Continue reading)
लगभग 1600 साल पुरानी इतिहास कथा। इसका नाट्यरूपांतरण लगभग 80 साल पहले जयशंकर प्रसाद ने किया। नाटक है ध्रुवस्वामिनी। निर्देशक मृत्युंजय प्रभाकर 2009 में जब ऐसी कथा को मंचन के लिए चुनते हैं तो पहली बार में आश्चर्य करने का... (Continue reading)
नवंबर की खुशगवार सुबह. रविवार का दिन. समय दस से ग्यारह के बीच. तमाम घरों की छतों और आँगनों में सुबह की चर्या का उतार. बड़े-बूढे अखबार की खास खबरें कब की खत्म कर चुके. अब उनकी निगाह बोर संपादकीय... (Continue reading)
लिटिल टेरेरिस्ट युवा निर्देशक अश्विन कुमार द्वारा बनायी गयी फ़िल्म है। फ़िल्म में तीन केन्द्रीय पात्र है। पहला और फ़िल्म का मुख्य पात्र जमाल नाम का छोटा बच्चा है। जमाल का गाँव हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की रेतीली सीमा के किनारे... (Continue reading)
धर्मेंद्र का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि जिंदगी से उन्होंने जो कुछ भी चाहा उन्हें मिल गया. हिंदी फिल्म जगत में अपने 50 साल पूरे करने वाले इस जाने-माने अभिनेता पर शांतनु गुहा रे का आलेख 1980 की गर्मियों की बात... (Continue reading)
हिंदी फिल्मों के इतिहास में सिर्फ तीसरी महिला संगीतकार स्नेहा खानवलकर के प्रयोगवादी संगीत की हर कोई तारीफ कर रहा है. ईशा मनचंदा का आलेख 2008 की सर्दियों में एक फिल्म रिलीज हुई जिसके संगीत में घुली ठेठ पंजाब और हरियाणा... (Continue reading)