स्तंभ

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ये दिल मांगे मोर

ये दिल मांगे मोर

आज के इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में किसी भी व्यक्ति, व्यवसाय, वस्तु या विचार के लिए अपने अलग अस्तित्व , अपनी अलग विशेषताओं को अपने लक्ष्य समूह के ध्यान में लाना एक अनिवार्यता हो गया है. आजकल किसी भी... (Continue reading)

आसमान से फलक तक

आसमान से फलक तक

जब भी उदास होता हूँ, आसमान की ओर टकटकी लगा कर देखता हूँ और आसमान झट अपनी बाँहों में भर झुला झुलाने लगता है. पंछी चहचहा कर गीत सुनाने लगते हैं. चाँद – सितारे करतब दिखाने लगते हैं. मैं इन... (Continue reading)

भारतमाता को बचाओ (व्यंग्य)

भारतमाता को बचाओ (व्यंग्य)

भारतमाता को बचाओ……..भारतमाता को बचाओ जुलुस में मैं भी शामिल हो गया,रास्ते में कई नेताओ,अभिनेताओं की टोलिया जुलूस में शामिल होती गई,सब सुर में सुर मिला रहे थे “भारतमाता को बचाओ ” ज्यों-ज्यों नारों की गूंज बडती जा रही थी त्यों-त्यों... (Continue reading)

राठौर क्यों हंसा? (व्यंग्य)

राठौर क्यों हंसा? (व्यंग्य)

राठौर क्यों हंसा ? (व्यंग्य) बैताल ने विक्रम से प्रश्न किया -ये ज्ञानी,पराक्रमी विक्रम तू बता कि सजा सुनाये जाने के बाद भी राठौर क्यों ?हंसा. विक्रम-हे बैताल,इसके लिए में तुझे फ्लश्बैक में लेजाता हूँ ,ये राठौर नामक प्राणी अपनी जवानी के... (Continue reading)

ऐसा क्यों है मेरा गांव ?

ऐसा क्यों है मेरा गांव ?

ऐसा क्यों है मेरा गांव? मेरा गांव बिहार के वैशाली जिले में आता है, गांव का नाम है बान्थु. इस गाँव में भोमिहरों का बोलबाला है. अभी एक-दो दिन पहले ही अपने गांव से लौटा हूं, इस बार मेरा गांव प्रवास... (Continue reading)

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य )

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य )

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य ) हमारे देश में प्रजातंत्र को स्थापित हुए कई साल बीते पर सत्ता का सुख इच्छाधारियो को नहीं मिल पा रहा है,कई परिवार टूट रहे है रिश्ते दम तोड़ रहे है,महत्वाकांक्षाए घुट रही है.प्रजातंत्र को बचाना है... (Continue reading)

बिल्लियों की लड़ाई में बन्दर का फायदा

बिल्लियों की लड़ाई में बन्दर का फायदा

   (शिवसेना, मनसे और कांग्रेस- बिल्लियों की लड़ाई में बन्दर का फायदा) लो भैया आज का दिन भी बीत गया… दिन भर की मारामारी के बाद रविवार का दिन भी आखिर शांति से बीत ही गया…. बस कोई कोई समाचार चैनल... (Continue reading)

महिला सशक्‍तीकरण की दुधारी तलवार: समसंपत्ति अधिकार

महिला सशक्‍तीकरण की दुधारी तलवार: समसंपत्ति अधिकार

महिला-अधिकारों या समान अधिकारों की सारी बातें तब तक खोखली हैं जब तक महिला को याने मां बहन और पत्नी के परिवार की आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी का स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक वह स्वयं में एक निर्णायक... (Continue reading)

आमची मुंबई को एक ठो फुटपाथ दिला दे बाबा !

आमची मुंबई को एक ठो फुटपाथ दिला दे बाबा !

साठ के दशकं में मुंबई में कालबादेवी और भूलेश्र्वर का शुमार शहर के भीड़भाड़ भरे व्यस्ततम इलाको में होता था। लोग हंसी मजाक में कंहा करते थे किं दादर से लोकल ट्रेन या बस में चर्नी रोड तक तो आप... (Continue reading)

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य )

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य )

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य ) आन्ध्रप्रदेश के मुख्य मंत्री की हेलीकाप्टर दुर्घटना में दुखद मृत्यु से देश की नेता बिरादरी में हेलीकाप्टर यात्रा से एक अजीब सा खोफ सा बेठ गया है,अब नेताओ ने अपनी जान की रक्षा के... (Continue reading)

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