आसमान से फलक तक

आसमान से फलक तक

आसमान से फलक तक

जब भी उदास होता हूँ, आसमान की ओर टकटकी लगा कर देखता हूँ और आसमान झट अपनी बाँहों में भर झुला झुलाने लगता है. पंछी चहचहा कर गीत सुनाने लगते हैं. चाँद – सितारे करतब दिखाने लगते हैं. मैं इन... (Continue reading)

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