निठ्ठलों की ठिठोली

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भारतमाता को बचाओ (व्यंग्य)

भारतमाता को बचाओ (व्यंग्य)

भारतमाता को बचाओ……..भारतमाता को बचाओ जुलुस में मैं भी शामिल हो गया,रास्ते में कई नेताओ,अभिनेताओं की टोलिया जुलूस में शामिल होती गई,सब सुर में सुर मिला रहे थे “भारतमाता को बचाओ ” ज्यों-ज्यों नारों की गूंज बडती जा रही थी त्यों-त्यों... (Continue reading)

राठौर क्यों हंसा? (व्यंग्य)

राठौर क्यों हंसा? (व्यंग्य)

राठौर क्यों हंसा ? (व्यंग्य) बैताल ने विक्रम से प्रश्न किया -ये ज्ञानी,पराक्रमी विक्रम तू बता कि सजा सुनाये जाने के बाद भी राठौर क्यों ?हंसा. विक्रम-हे बैताल,इसके लिए में तुझे फ्लश्बैक में लेजाता हूँ ,ये राठौर नामक प्राणी अपनी जवानी के... (Continue reading)

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य )

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य )

प्रजातंत्र के खम्भे (व्यंग्य ) हमारे देश में प्रजातंत्र को स्थापित हुए कई साल बीते पर सत्ता का सुख इच्छाधारियो को नहीं मिल पा रहा है,कई परिवार टूट रहे है रिश्ते दम तोड़ रहे है,महत्वाकांक्षाए घुट रही है.प्रजातंत्र को बचाना है... (Continue reading)

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य )

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य )

आगे कुवा पीछे खाई ( व्यंग्य ) आन्ध्रप्रदेश के मुख्य मंत्री की हेलीकाप्टर दुर्घटना में दुखद मृत्यु से देश की नेता बिरादरी में हेलीकाप्टर यात्रा से एक अजीब सा खोफ सा बेठ गया है,अब नेताओ ने अपनी जान की रक्षा के... (Continue reading)

जान लड़ा दूंगा (व्यंग्य रचना)

जान लड़ा दूंगा (व्यंग्य रचना)

एक घुटे-घुटाए,मंजे-मंजाये नेता का बेटा अपनी ही पार्टी के राज्य में पैसा खाते पकडा गया,बेचारे की सेहत देखकर अँधा भी बता सकता है की खाते-पीते घर का सपूत है. जैसा की अक्सर होता है नेताजी पहुंचे तांत्रिक बाबा की शरण में -”बाबा मुझे बचा लो,बाबा मुझे बचा लो मेरी उम्रभर की कमाई मिट्टी में मिल... (Continue reading)

खर्चे बढाओ देश को बचाओ

खर्चे बढाओ देश को बचाओ

वित् मंत्रीजी ने मार्मिक शब्दों में गुहार  लगाई की देश को आर्थिक मंदी से बचाना है तो सरकारी खर्चो को बढाना   होगा,सरकारी खर्चे बढाने से मार्केट में तरलता  बढेगी,जनता की जेब में पैसा आएगा तो वो खर्चा करेगी इससे कल   कारखाने चल पड़ेंगे,खर्चे बढाने की उनकी अपील को नेताओ ने अप्रतियाशित तरीके से हाथो-हाथ लिया,कुम्भकरण की   नींद सोने वाले नेता जाग उठे,सुझावों के पुलिंदे लिए... (Continue reading)

चाँद निकला बादलों से( व्यंग्य )

चाँद निकला बादलों से( व्यंग्य )

सफ़ेद हाथी ( व्यंग्य ) एक पुरानी कहावत है कि हाथी जिया तो लाख का मरा तो सव्वा लाख का,अब एक नई कहावत जान लीजिये हाथी उधमी का बीमार हुवा तो उधमी को खा जायेगा,पर यदि सरकारी हाथी हुवा तो सफ़ेद हाथी कहला... (Continue reading)

फ़ुल सूट वाले भगवान ( व्यंग)

आजादी के बाद हमने हर विधा में हद से ज्यादा तरक्की की हैं. हमारी अंग्रेजी नोलेज अंग्रेजों के अंग्रेजी नोलेज से कई गुना हैं. हमारे लल्ला-ललनाओं का अंग्रेजी भाषा प्रवाह देखकर अंग्रेज भी दांतो तले अंगुली दबाते रहते हैं तथा... (Continue reading)

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मनचाहे मंत्रिपद ले के रहेंगे

दरवाजे बंद थे अन्दर गरमागरम बहस हो रही थी,दरवाजे से कान लगाये कालू, पालू और मालू बाहर बैठे मजे ले रहे थे. अन्दर से छन-छन के आवाज़ आई हमको अठारह के अठारह मंत्रिपद मांगता,कुर्सी लेना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है.कालू ने हंसते कहा... (Continue reading)

समर्थन तो ले लो ( व्यंग्य रचना )

समर्थन ले लो,समर्थन ले लो मेरे भाई बिलकुल मुफ्त,बिना किसी किन्तु-परन्तु,बिना किसी मौल-भाव के,ऐसा फ्री समर्थन न मिला है न कभी मिलेगी,जिस समर्थन में समर्थन लेने वाले पर नहीं समर्थन देने वाले पर उपकार हो रहा है,देने वाला सब कुछ मुफ्त में लुटा... (Continue reading)

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