Posts Tagged ‘डॉ॰ कविता वाचक्नवी’

रिश्ते : दो स्थितियाँ

रिश्ते : दो स्थितियाँ

(1) रूठें कैसे नहीं बचे अब मान मनोव्वल के रिश्ते अलगे-से चुपचाप चल रहे ये पल दो पल के रिश्ते . कभी गाँठ से बंध जाते हैं कभी गाँठ बन जाते हैं कब छाया कब चीरहरण, हो जाते आँचल के रिश्ते आते हैं सूरज बन, सूने में चह-चह भर जाते... (Continue reading)

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