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शशि पाधा की दो कविताएं

शशि पाधा की दो कविताएं

कुछ पल दूर कहीं कोई छेड़े साज अन्तर्मन के खोल झरोखे मैं भी कुछ पल जी लूं आज । ओस कणों के पहनूं गहने अरुणाई से मांग भरूं लौट न आयें नयनन बदरा अधरों से कोई गीत बुनूं इन्द्र धनु की सतरंग लड़ियां मन अंगना में बांधूं आज वीणा... (Continue reading)

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