इश्क़ क़फ़न में लिपटा बादलों के छुपता सूरज अँधेरी कब्र में सो चुका था न जाने कब से अपने आप से रूठा सूरज एक आग के दरिया में बहते किनारे उफक के न जाने जलते रहे किसके लिए दिन के ढल जाने तक| कौन था वह? न जाने कबसे खड़ा था जो... (Continue reading)
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